Monday, 3 November 2025

An Old Draft

बढ़ते हुए प्रदूषण से दुनिया को बचाने की तमाम कोशिशों के बीच डाॅक्टर भरत झुनझुनुवाला का लेख “ संशय वाला समाधान ” एक खास महत्व रखता है ।जैसा कि वह कहते हैं कि “अर्थशास्त्र में एक कथन है कि कुछ भी मुफ़्त नहीं है ।”आज हम जिस सोलर ऊर्जा को स्वच्छ मानते हैं वही कल कुछ भिन्न प्रकार की परेशानियां हमारे लिए पैदा कर सकती है ।उनका यह कहना कि राजस्थान के रेगिस्तान में सोलर प्लांट लगाने से रेगिस्तान का तापमान कम होगा पूरी तरह गलत नहीं है ।इससे रेगिस्तान की हवा ऊपर नहीं उठेगी और हिंद महासागर से बादल का आना कम हो सकता है । अतएव ये सोच गलत है कि वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग से मनुष्य और भी ज्यादा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर पायेगा ।कार्बन उत्सर्जन की समस्या का अंतिम हल खपत में नियंत्रण करके ही आयेगा ।ये एक तरह से उपभोक्तावादी मानसिकता से छुटकारा पाने वाली बात ही लगती है 

          भारतीय अध्यात्म तो सदैव ही इस विचार का प्रतिपादक रहा है कि भोग करने से सुख प्राप्त नहीं होता ।अतः सङक पर फ्लाईओवर बनाने के साथ ही इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि सङकों पर वाहनों की संख्या भी नियंत्रित रहे ।

               अतः उनका यह कहना बिलकुल सही प्रतीत होता है कि ,’पर्यावरण  की वैश्विक चर्चाओं में हमें खपत में नियंत्रण करने की जरूरत को जोरदारी के साथ उठाना चाहिए ,ताकि कार्बन उत्सर्जन की समस्या का सही समाधान हासिल हो सके और हम विश्व को अध्यात्म के रास्ते ले जाने की अपनी भूमिका का निर्वाह कर सके ।

Hope

                               Hope                           Hope! that is what you look like,             two leaves in soil ,...